09 मार्च, 2017

पुस्तक संस्कृति को समर्पित एक शहर बीकानेर

डॉ. नीरज दइया
     देश के पटल पर बीकानेर पापड़-भुजिया और रसगुल्लों के कारण तो विख्यात है ही, साथ ही छोटी-काशी और हजार हवेलियों का यह शहर एक आश्चर्यजनक किंतु सत्य घटना को साहित्यिक अवदान के रूप में जोड़ता है कि यहां हजार से अधिक लेखक सक्रिय हैं। हजार लेखकों और पाठकों का होना हिंदी साहित्य के विकास क्रम में वर्तमान समय की कोई कल्पना नहीं, वरन सत्य घटना है। बीकानेर शहर के एक सौ पचास कहानीकार की रचनात्मकता का प्रमाण है ‘कथारंग-दो’। इसके पहले अंक में इसी शहर 75 कहानीकार शामिल हुए थे और इस बार यह संख्या दुगनी है। महत्त्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि ‘कथारंग’ का अभिनव जन-अनावरण हुआ। कथारंग-दो की विशेष बात यह भी है कि कहानीकारों में 56 महिलाएं हैं। इस संग्रह में वर्ष 1931 से 1998 तक की अवधि में जन्मे कहानीकारों को शामिल किया गया है। किसी निर्धारित भौगोलिक सीमा में रहने वाले कहानीकारों का संभवतया देश में यह पहला संकलन है। जन-अनावरण के अंतर्गत शामिल होने वाले हर व्यक्ति ने किताब को आमंत्रण मूल्य 300/- में खरीदा और इस प्रक्रिया में शामिल हुआ। लगभग 300 लोगों का किताब को खरीद कर जन-अनावरण करना कम महत्त्वपूर्ण नहीं है।
    ‘कथारंग’ के संपादक युवा नाटककार हरीश बी. शर्मा कहते हैं कि किताबें खरीदकर आमजन शामिल होकर यदि लोकार्पण की प्रक्रिया में शामिल हुए हैं तो यह उनका पुस्तक-संस्कृति के प्रति समर्पण है। जन-सामान्य को सोचने-समझने के लिए कथारंग के माध्यम से एक दृष्टिकोण मिलेगा। साथ ही निकट भविष्य में कहानी-लेखन कार्यशाला के आयोजन द्वारा बीकानेर में कहानी रचनात्मकता को अधिक गति प्रदान करेंगे। लोगों का मानना है कि मूल बात साहित्य को जन जन तक पहुंचने में सफल होना है। साहित्य में कहानी ही जन के अधिक करीब पहुंच सकती है इसलिए संभतः कहानी को लेकर ऐसा अभिनव आयोजन रखा गया है। बीकानेर के धरणीधर में साहित्य महोत्सव की भांति संपन्न इस जन-अनावरण के विषय में कहा गया है कि यह केवल इस वर्ष ही नहीं, प्रति वर्ष होगा। कहानी को आम जन तक पहुंचाना और कविता के आस्वादन के साथ-साथ दिन भर के इस कार्यक्रम में संकलित कहानीकारों का सम्मान भी किया गया। साथ मेहनत और लगन से व्यावसायिक ऊंचाइयां छूने वाले बीकानेर के लोगों के जीवन-संघर्ष पर आधारित कृति ‘हुनर और हौसले की कहानियां’ को भी जन-अनावरण में शामिल किया गया। 
    कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कविता कोश के संस्थापक ललित कुमार ने कहा कि आम व्यक्ति तक साहित्य पहुंचे, इससे बेहतर तो कोई बात हो ही नहीं सकती। पढ़ने की आदत जीवन में चामत्कारिक परिवर्तन कर सकती है। ललित कुमार ने बताया कि कविता कोश और गद्य कोश के माध्यम से वैश्विक स्तर पर साहित्य को प्रसारित करने का कार्य किया जा रहा है, इसी तरह से कथारंग का भी एक प्रयास है और इस तरह के प्रयासों से भाषा और साहित्य ही नहीं समाज का भी हित होगा। विशिष्ट अतिथि व्यवसायी कन्हैयालाल बोथरा ने अपने उद्वोधन में कहा कि साहित्य-कला के साथ-साथ बीकानेर व्यवसाय की दृष्टि से भी काफी उर्वर है और यही वजह हैं कि बीकानेर में व्यवसाय की अपार संभावनाएं  हैं। युवा पीढ़ी के लिए ‘हुनर और हौसले की कहानियां’ प्रेरक किताब साबित होगी। कार्यक्रम के अध्यक्ष समाजसेवी रामकिसन आचार्य ने कहा कि सृजन का प्रकाशन होना और देश-दुनिया के समाने आना ही उसकी सार्थकता होती है। ऐसे समय में बीकानेर के कथा-साहित्य के प्रकाशन में ‘कथारंग’ एक महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक घटना है।।
    स्वागताध्यक्ष साहित्यकार-पत्रकार मधु आचार्य ‘आशावादी’ ने कहा कथारंग में दूसरी बार प्रकाशित कहानीकार इस बात के लिए आश्वस्त करते हैं कि उन्होंने कहानी विधा को पूरे मन से स्वीकार किया है। बीकानेर के कथारंग में संकलित रचनाकार हिंदी कहानी में आने वाले समय में बीकानेर का नाम करेंगे ऐसी आशा की जानी चाहिए।
    दूसरे सत्र में काव्य-जुगलबंदी का आयोजन किया गया जिसमें ओजस्वी कवि-शायर राजेश ‘विद्रोही’ और आनंद वि. आचार्य ने अपनी काव्य रचनाओं से शमा बांधा। समापन सत्र में 150 कहानीकारों का सम्मान किया गया। कहानीकारों को सम्मान स्वरूप प्रतीक चिह्न के साथ दिए जाने वाले साहित्य में ‘दुनिया इन दिनों’ का कहानी अंक भी भेंट किया गया। सम्मान समारोह के मुख्य अतिथि पंचायत राज मंत्री राजेंद्रसिंह राठौड़ ने कहा कि बीकानेर में 150 रचनाकारों की कहानियां का संग्रह अपने आप में अनूठा प्रयास है। कोई कल्पना भी नहीं कर सकता कि बीकानेर में इतनी बड़ी संख्या में साहित्यकार जुटे हैं, जिनकी कलम में सृजन है। अध्यक्षता बीकानेर विधायक (पश्चिम) डॉ.गोपाल जोशी ने कहा ‘कथारंग’ जैसे प्रयास सम-सामयिक हैं। इस तरह के आयोजनों से न सिर्फ नए लेखकों को अवसर मिलता है, बल्कि संवाद की भी एक प्रक्रिया शुरू होती है।  कोलायत विधायक भँवर सिंह भाटी एवं राजस्थान विधानसभा प्रतिपक्ष नेता रामेश्वर डूडी ने भी कार्यक्रम में उपस्थित होकर कथारंग को समर्थन दिया। 
    साहित्य अकादेमी से हाल ही में राजस्थानी कहानी के लिए सम्मानित बुलाकी शर्मा का मानना है कि कथारंग के समानांतर यदि राजस्थान और पूरे भारत में साहित्य के लिए ऐसी लगन जाग्रत कर दी जाए तो आने वाला समय बहुत सुंदर होगा। आज के दौर में मिटती संवेदनाओं को ऐसे आयोजन और विचार ही जिंदा रख सकते हैं। समालोचक डॉ. मदन सैनी कहते है कि बीकानेर जैसे एक ही शहर की तीन पीढ़ियों के एक सौ पचास कहानीकारों को कथारंग द्वारा पाठकों से रू-ब-रू कराना एक ऐतिहासिक घटना है और इसके लोकार्पण पर आयोज्य ‘बीकानेर साहित्य महोत्सव’ किसी भी ‘लिटरेरी फेस्टिवल’ की आधारभूमि सिद्ध हो सकता है।
    कवि नवनीत पाण्डे का मानना है कि ‘कथारंग’ में संकलित कहानियां बेशक हिंदी कहानी के मानदंडों को पूरा ना करती हो किंतु यदि इनके रचनाकार साहित्य से जुड़ कर पाठक और पुस्तक संस्कृति के विकास में सहयोगी बनेंगे तो बहुत बड़ी घटना के रूप में यह प्रयास चिह्नित किया जाएगा। कवि-कहानीकार राजेन्द्र जोशी इसे जन जन का साहित्य के प्रति जुड़ाव मानते हुए कहते हैं कि साहित्य कभी मर नहीं सकता क्यों कि कहानी के संस्कार हमारे खून में है। दादी-नानी की कहानियां भले अब नहीं रही किंतु कहानी की संस्कृति के जीवित होने का यह आयोजन एक प्रमाण है।
    निकट भविष्य में संभव है बीकानेर में एक ऐसा आयोजन किसी पुस्तक के रूप में सामने आए कि जिसमें एक हजार रचनाकारों की रचनात्मकता का समेकित प्रणाम देश और दुनिया को देखने को मिले।

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