02 नवंबर, 2016

संकट में इन्हें सूचित कीजिए

अंग्रेज भारत क्या आए, सब कुछ उलटा-पुलटा कर गए। यह मैं नहीं पंच चाचा कह रहे हैं। उनकी डायरी बोल रही है। मेरी हालत ऐसा कुछ कहने या लिखने की नहीं है। आपकी हो तो आप जाने। मैं तो बस इतना जानता हूं कि मेरे ऐसा कहने-लिखने पर बहुत से सवाल होते हैं। एक सीधी-सी बात में लोगों को अनेक पेच दिखाई देते हैं। वैसे यह बात हमारे पंच चाचा जितनी सीधी-सपाट है। डायरी में लिखा है कि पहले सब मानते थे कि चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से हिंदू नव संवत्सर प्रारंभ होता है। राजस्थानी समाज का नया साल दीपावली के दिन से आरंभ होता है। गुजराती नया साल दीपावली के दूसरे दिन से आरंभ करते हैं। पंजाब में नया साल बैशाखी के साथ आता है और इस्लामिक कैलेंडर का नया साल मुहर्रम से आरंभ होता है। यह नववर्ष के सिलसिले में जनवरी-फरवरी को अपनाते हुए हमने धर्मनिरपेक्षता का परिचय दिया है। सब अपना अपना नया साल मनाओ पर जनवरी-फरवरी या कहें अप्रैल-मई में ऐसे अटके है कि यह हमारी अनेकता में एकता का लाजबाब उदाहरण बन गया है। साला कोई साल का समापन दिसम्बर में करता है, तो कोई मार्च को साल का ऐंडिंग बताता है। अजीब माथापच्ची है।
    इन सब बातों का दोष पंच चाचा अपनी डायरी में अंगेजों को देते हुए अनेक बातें लिखते हैं। आज संयोग ऐसा बैठा है कि वे अपनी डाय़री बाहर भूल गए और यह मेरे हाथ लग गई। हमारे धर्मनिरपेक्ष देश के बारे में पंच चाचा के विचार मुझे प्रभावित करते हैं। वे तो आज भी नववर्ष का शुभारंभ दीपावली से करते हैं। आप भले पंच चाचा को ठेठ मारवाड़ी या राजस्थानी कह लें, पर वे अपनी आस्था पर अडिग है। सच में यह बहुत बड़ी बात है कि पंच चाचा की आस्था में उनका सुख, समृद्धि, वैभव और ऐश्वर्य समाहित है।
    पंच चाचा की आस्था का अनुपम उदाहरण उनकी डायरी के पहले पन्ने पर देख रहा हूं। अनेक जानकारियों के बाद बड़े अक्षरों में छपा है- ‘संकट में इन्हें सूचित कीजिए।’ पंच चाचा ने जहां मेरा नाम लिखा होना चाहिए वहां हमारे शहर और आस-पास के अनेक देवी-देवताओं के नाम लिख दिए हैं। लिखा है कि संकट में इन्हें सूचित कीजिए : कोड़मदेसर भैंरूनाथ, हनुमानजी, गढ़ गणेशजी, देशनोक करणी माता, नगणेचीजी माताजी, सालासर बालाजी, पूनरासर बालाजी, मोरखाणा सुसाणीदेवी...। मैं तो इतने नाम देख कर हैरान हूं कि अगर संकट के समय इन्हें सूचित करना पड़ा तो कैसे सूचित करूंगा। काश कि यहां मेरा नाम और मोबाइल नंबर लिखे हुए होते तो मैं सोचता कि पंच चाचा को मुझ पर भरोसा है। पंच चाचा खुदा ना करे कि आप पर कोई संकट आ जाता है तो मैं क्या करूंगा। मैं कर भी क्या सकता हूं। सच में तो करेंगे ये सभी जिनके अपाने नाम लिखें हैं। डॉक्टर भी सब कुछ करने के बाद भी कहते हैं- सब ऊपर वाले के हाथ में है। ये ऊपर वाला अनेक नामों से हमारे आस-पास अपने कुछ स्थान बनाकर बैठा है। पंच चाचा का भरोसा है कि संकट के समय ये सभी या इन में से कोई एक-आधा मदद जरूर करेगा।
    मैं उस युग की कल्पना कर रहा हूं जब इन सभी देवी-देवताओं के पास भी मोबाइल आ जाएगा और पंच चाचा जैसे हमारे चाचा जिस किसी भी नाम लिखेंगे साथ में मोबाइल नंबर भी लिखेंगे। मुझे पता नहीं कि मैं संकट में इन्हें सूचित कर सकूंगा या नहीं, फिलहाल संकट में तो मैं आने वाला हूं क्यों कि दरवाजा बजा है और संभव है कि पंच चाचा आ रहे हो। मैं यहां उनकी डायरी को लिए बैठा हूं यह जानकर वे नाराज जरूर होंगे। मैं भला उन्हें क्यों नाराज करने लगा। मैंने कुछ नहीं देखा, कुछ नहीं पढ़ा और हां आपसे पूछे तो आप भी कह देना कि मैंने आपको कुछ नहीं बताया।


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