02 दिसंबर, 2017

अंगुली की अमरकथा


वे दिन लद गए जब एक हाथ से ताली नहीं बजा करती थी। अरे भैया, अब इन पुराने जमाने की बातों को भूल जाओ, एक हाथ और दो हाथ को छोड़ कर बस एक अंगुली को सलामत रखो। अब तो बस एक बटन दबाओ और जितनी चाहो तालियां रिमोट से बज सकती है। एक अंगुली की महिमा निराली है। सच्चाई तो यह है कि आजकल सारी करामात बस एक अंगुली की है। सुनते हैं कि बड़े-बड़े देशों ने ऐसे-ऐसे हथियार बना रखें है कि एक बटन दबाओ और दुश्मन देश तबाह हो सकता है। अंगुली के इशारे से काम करने और कराने वालों की बड़ी पूछ है। सब को काम ऐसा चाहिए कि उस पर कोई अंगुली नहीं उठा सके। जो अंगुली के रहस्य को समझते हैं वे जानते हैं कि कोई काम सीधी अंगुली नहीं करवाया जा सकता है उसके लिए अंगुली टेढ़ी करते कितनी देर लगती है।
अंगुलियां समझदारी में सबसे आगे हैं। देखिए किसी की तरफ एक अंगुली करते ही तीन अंगुलियां खुद हमारे समाने हो जाती है। अर्थात हम अधिक सजग और जागरूक हो जाते हैं। खुद अपने भीतर तीन सवालों के जबाब लेकर चलने वाला किसी से एक सवाल करेगा तो कभी मात थोड़े खाएगा। हाथ में लकीरें होती हैं तो अंगुलियों पर पर्वत होते हैं। हाथ तो केवल दो होते हैं और अंगुलियां दस होती है। फिर पैरों की अंगुलियां शामिल करें तो बीस का आकाड़ा काफी होता है। पैर की अंगुलियां तो अंगुलियां ही कहलाती है और पैरों को तो हम हाथ मान नहीं सकते हैं। कुदरत का खेल किसी के इक्कीस और बाईस तक अंगुलियां होती है। सबसे बड़ी बात अंगुलियों की प्रजाति में अंगूठा भी होता है जो बड़े काम का होता है। अंगूठे के काम उम्र के मुताबिक बदलते रहते हैं।
रिश्ता कोई भी हो उसमें एक बंधन होता है। बंधन है किसी डोर अथवा धागे की कल्पना भी होती है। ऐसे में डोर और धागे कभी टूट जाते हैं या उलझने लगते हैं तो रिश्ते टूटे उससे पहले उन्हें सुलझाने का काम तेज तर्राट अंगुलियों के बस की बात है। अपने दो हाथ ताली बजा सकते हैं तो दो अलग अलग हाथ रिश्तों के बंधनों में बंधते हैं तब भी अंगुलियां ही हाथ मजबूती से उन्हें पकड़ और कसावट देने में सहायक सिद्ध होती हैं। सास कहती हैं कि बहू बेटे को अंगुलियों पर नचवा रही हैं और बहू कहती है कि सास ने बेटे को अंगुली पकड़ा कर अभी तक बच्चा बना रखा है। मां की अंगुली पकड़ कर बेटा आखिर कब तक चलेगा? ऐसे ताने सुन सुन कर बेटा मां की अंगुली छोड़ कर अपनी पत्नी की अंगुली पकड़ लेता है। बच्चों और पुरुषों का स्वभाव है कि वे अंगुली पकड़ कर ही बांह पकड़ते हैं। अंगुली के महत्त्व की प्राचीनतम कथा अंगुलीमाल की है। उसे एक शनक थी कि लोगों को लूटता था और उन्हें मार कर उसकी एक ऊंगली काट कर अपनी माला में पिरोता था। गुरु द्रोण ने मोटी अंगुली यानी अंगूठे को मांग कर अपना प्रेम प्रगट किया था। लोग भोले थे जो लूटते थे और अंगुली-अंगूठा दे देते थे, अब भी लोग भोले हैं। अंगुलीमालों और द्रोणाचार्यों ने रणनीतियां बदल ली हैं। शब्दों के जादू से वे लोगों को पहले बहलाते-फुसलाते हैं फिर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन पर अंगुली का खेल करवा कर सब कुछ अपने नाम करवा लेते हैं।
डॉ. नीरज दइया 
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