08 दिसंबर, 2017

खर, दूषण का भाई प्रदूषण

सच में मैं ड्रामा नहीं कर रहा। मेरी आंखें जल रही है। देखिए जलते जलते लाल हो गई है। मैं सांस नहीं ले पा रहा हूं पॉल्यूशन मास्क पहन लिया है फिर भी मुझे तकलीफ हो रही है। पूरा शरीर ढक कर रखता हूं सन स्ट्रोक से मुझे खतरा है। सन रेज आजकल कितनी खतरनाक है कि स्किन का सत्यानाश हो जाता है। कुछ लोग समझते हैं यह फैशन है। कुछ भी समझे मेरी बला से, मुझे क्या फर्क पड़ता है। पानी भी साथ लेकर चलता हूं। बाहर का पानी नहीं पी सकते। मिनरल वाटर की कंपनियां भी ऐसी है कि हम कोई भरोसा नहीं कर सकते हैं। सुबह सुबह ही उबाल कर दो-तीन बोलत भर लेता हूं। मजबूरी है कि बाहर निकलना पड़ता है। नहीं तो घर से सेफ जगह भला कौनसी है। बाहर निकलते ही पहला डर तो यही कि कोई किडनेप ना कर ले। गली गली में चोर उच्चके घूमते हैं। किसी का क्या भरोसा कि क्या कुछ कर जाए। बड़ा संभल कर रहना पड़ता है। जनाब यह जिंदगी की खर खर है। जीवन की गाड़ी कभी भी जबाब दे सकती है। इसका कोई भरोसा नहीं। ऐसी जिंदगी से मौत भली यह जिंदगी नहीं है। छोड़ो यह सब, इतनी सावधानियों की जरूरत ही नहीं है। अरे भैया, जिंदगी हंसने-गाने का नाम है।
इन सब स्थितियों को देखते हुए हंसते-गाते हुए हमने भारत को स्वच्छ करने का प्रयास जोर-शोर से आरंभ कर दिया हैं। भगवान श्री राम ने खर और दूषण का वध किया था और हम सब को मिलकर उनके बड़े भाई प्रदूषण का वध जरूर करेंगे। पर हमारे समाने समस्या यह है कि वध कैसे करेंगे? रामजी के पास तो तीर-कमान था, अब आप और हम मिलकर कौनसा तीर चलाएंगे? भला हो सरकार का कि सरकार ने इवन-ओड का चक्कर चलाने का प्रयास किया पर उसमें भी घोचेवाजी और मीन-मेख बहुत हुई हैं। समझते नहीं कि हमारे पूरे देश ही नहीं दुनिया भर में रावण के भैया पधार चुके हैं और स्थिति यह है कि अभी रामजी का अता-पता नहीं है। यह पक्का है कि वे भी जरूर आएंगे। पर फिलहाल उनका इंतजार कर रहे हम क्या करें। हमें भी तो कुछ करना चाहिए कि खाली इंतजार ही करते रहें। दिल्ली में प्रदूषण है इसका सब को पता है और पहले से ही पता था कि हां भाई दिल्ली में प्रदूषण है। पर यह फिरोज़ शाह कोटला स्टेडियम में टेस्ट मैच में श्रीलंकाई खिलाड़ी पॉल्यूशन मास्क पहन अपना मुंह छिपा रहे हैं कि प्रदूषण भैया कहीं हमें देख ना ले। अरे देख भी लेगा तो क्या कर लेगा प्रदूषण। हम सब खड़े हैं ना सीना ताने। यह बेवजह मुद्दे को भड़का रहे हो भैया। लंकाधिपति के देश से पधारे खिलाड़ियों तुम्हें सलाम! जीत-हार तो खेल में होती ही रहती है, पर इतना ड्रामा।
पंच काका कहते हैं कि दिल्ली में रविवार का एयर क्वालिटी इंडेक्स चारों ओर से समंदर के घिरे श्रीलंका में प्रदूषण के स्तर से काफी कम था। पूछना यह है कि भैया यह ड्रामा हार के डर का नतीजा है या फिर सच में खर-दूषण के बड़े भैया प्रदूषण से आपने सांकेतिक घूंघट रखने का नया रिवाज निकाला है।
 नीरज दइया
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