27 दिसंबर, 2017

खतरनाक खिचड़ी / डॉ. नीरज दइया

आपको मैं एक जादू दिखाना चाहता हूं। कोई मदारी तो मैं हूं नहीं और अगर होता तो भी बंदर या भालू को यहां कागज पर कैसे दिखा सकता हूं। उन्हें देखने के लिए तो आपको मेरे मजमे में कहीं उपस्थित होना होता। खैर मैं एक जादू लाया हूं। जादू यानी मैजिक। मैजिक कहते ही आपके दिमाग से ‘बंदर-भालू’ सब गायब हो गए हैं। क्यों कि फिलहाल मीडिया का मैजिक चल रहा है कि उसने इस शब्द के साथ माननीय प्रधानमंत्री का नाम जोड़कर ‘मोदी-मैजिक’ के अनुप्रास को चर्चित कर दिया है। सोचने की बात यह है कि भला जादू में जादू कहां और कैसे काम करता है या कर सकता है। क्या कोई जादू किसी को वोट दिला सकता है? मतदान में तो आप और हमने यानी देश की जनता ने भाग लिया है। मेरा मनना है कि कोई जादू तो हुआ है। जैसे फिल्म में ‘तेरा जादू चल गया’ और ‘सीने से दिल गया’ जैसी बातें जादू जैसी दिखाई देती हैं वैसे ही रोजमर्रा के जीवन में अनेक जादू होते रहते हैं।
आप यकीन कीजिएगा कि जादू होता है और कहीं भी हो सकता है। किसी के भी साथ हो सकता है। मैं तो यहां तक मानता हूं कि कोई भी जादू कर सकता है। मैं यहां एक शब्द लिखता हूं- ‘खिचड़ी’। देखिए यह इस शब्द का यह जादू है कि खिचड़ी शब्द पढ़ते ही आप के दिमाग में राष्ट्रीय खाद्य पदार्थ की तश्वीर उभरने लगी है। मशहूर शेफ संजीव कपूर ब्रांड एम्बेसडर बन कर इंडिया गेट पर हजार किलोग्राम खिचड़ी बनाने की तश्वीर या ऐसा विचार जेहन में आना क्या किसी जादू से कम है। खिचड़ी वे अनाथ बच्चों को खिलाएं या स्कूलों में मिड डे मील में, हमें क्या? मैं आपको इस कहानी से बहुत पहले ले चलता हूं जहां वर्षों पुरानी खिचड़ी अभी भी अधपकी आपका इंतजार कर रही है। लिजिए आपके दिमाग में बीरबल की खिचड़ी का दृश्य उभर कर आ गया है। अकबर और बीरबल को ना आपने देखा और ना मैंने। उनकी अधपकी खिचड़ी के चर्चे क्या हजार किलोग्राम की खिचड़ी पकाते ही भूल गए हैं?
एक समय था जब खिचड़ी गरीबों और बीमार लोगों का भोजन हुआ करती थी, अब जमाना बदल गया है और खिचड़ी को बहुत सम्मान मिल चुका है। यानी खिचड़ी भी वीआईपी हो गई है। खिचड़ी खाने वाली से भी अधिक वीआईपी दिमाग में पकने वाली होती है। मेरे दिमाग में तो हर दिन खिचड़ी पकती रहती है। अगर आपके पास भी दिमाग है तो आप अपना हाल सुनाएं। खास बात दिमाग में खिचड़ी पकाने के लिए बुद्धि की जरा भी जरूरत नहीं है। मेरे जैसे और मूर्ख दिमाग खिचड़ी पकाने के बेहतरीन स्थल कहे जा सकते हैं।
पंच काका कहते हैं कि यह स्कूली लड़के के दिमाग में पकने वाली खिचड़ी का ही कमाल था कि उसने ग्रेटर नोएडा में अपनी मां और बहन की जघन्य तरीके से हत्या कर दी। बिना खिचड़ी पके भला कोई बेटा अपनी प्यारी मां और बहन पर क्रिकेट बैट और कैंची से ताबड़तोड़ वार कर हत्या कर सकता है? भैया ये बड़ों और बच्चों के दिमाग में पकने वाली खिचड़ी बड़ी खतरनाक होती है।
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