29 नवंबर, 2017

समस्या-समाधन गीता

 आज देश में समस्याएं बहुत सारी है। यहां मैं समस्याएं गिनाने लगूं तो गिनाते-गिनाते रात हो जाएगी। इतना समय ना आपके पास है और ना मेरे पास। आपका बस थोड़ा सा समय लूंगा। अधिक कुछ कहने या सुनने की यह बात भी नहीं है। बात बस इतनी सी है जो मैं कहना चाहता हूं कि अगर आज ढेरों समस्याएं है तो उनके लिए ढेरों समाधान ढूंढ़ने की जरूरत ही नहीं है। आप कहेंगे ऐसा कैसे? तो भाइयों और बहनों ऐसा ही है। इतनी सारी समस्याओं जब भगवान ने इस संसार में बनाई है तो वे अंतर्यामी हैं। उन्होंने इन सब का समाधन पहले बनाया है। आज पढ़े-लिखे लोग धर्म से कटते जा रहे हैं। अरे मनुष्य है तो उसका अपना धर्म भी है। बिना धर्म के कोई आदमी हो ही नहीं सकता। धर्म की बात करते ही विपक्ष वाले शोर करते हैं, कुछ लोग इसे धार्मिक कट्टरता कहते हैं। मेरा कहना है कि ऐसा बिल्कुल नहीं है। हम सब भाई-भाई है। यह देश हम सब भाइयों का है तब अगर किसी को यहां रहना है तो वे भाई बनकर रहें। अगर यह बात भी जिनके गले नहीं उतरती वे गद्दार है। छोड़िए इन सब बातों को फिर कभी.... अभी तो मैं मुद्दे की बात बता रहा हूं। मुद्दा यह है कि हमारी सारी समस्याएं एक तरफ और एक तरफ गीता। आज के दौर में हमें बचना है या कहें संभलना है तो बस एक समाधान है गीता। हमारा हाथ थामने या हमें बचाने के लिए कोई बाहर से नहीं आएगा। हमें बस गीता ही बचा सकती है। और पूरा पांडाल करतल ध्वनी से गूंज उठा।
माननीय नेता जी फिर गीता-रहस्य समझाने लगे। मैं कहना चाहता हूं- आप और हम गीता को भूलाकर कभी आगे बढ़ ही नहीं सकते। हमें आगे बढ़ना है और देश को आगे बढ़ना है तो गीता ही हल है। प्रगति का पथ है गीता। आपको और हमको किसी दूसरे तीसरे की तरफ झांकने या मुंह करने की जरूरत नहीं है। क्या समझे, हमारी सारी समस्याएं सारे झगड़े और जो भी कुछ है उन सब का समाधान है गीता। कुछ लोग फिर इसे राजनीति का रंग देंगे। भाइयों और बहनों इसमें कोई राजनीति नहीं है। इसमें दूर दूर तक राजनीति नहीं है। पर यह सारी राजनीति का भी समाधान है। जिन समस्याओं की बात हम कर रहे हैं उनमें राजनीति भी एक समस्या है। अब समय आ गया है कि हमें खुल कर बोलना होगा। मैं आप सब के भले की बात कर रहा हूं। अपना भला ही देश का भला होता है। यह स्वार्थ नहीं है। भैया जब यहां का आम आदमी तरक्की करेगा तभी तो देश तरक्की करेगा। आम आदमी की सारी समस्याओं का हल है गीता। चलिए आप में से कोई आदमी खड़ा हो जाए और वह कोई एक समस्या यहां रखें तो अभी हल हो जाता है।
आम आदमी एक खड़ा होकर हाथ जोड़ते हुए बोला- ब्लू व्हेल.... उसका इतना कहना था कि पांडाल तालियों से गूंज उठा। नेताजी के चेहरे पर चिर मुस्कान कुछ अधिक ही फैलने लगी। वे बनावटी हंसी के साथ फिर कहने लगे- ब्लू व्हेल जैसे खेल के विनाश से गीता ही बचा सकती है।... बच्चे और बड़े-बूढ़े सब अपनी अपनी समस्या का समधान गीता में खोज सकते हैं। कहीं आने-जाने या फिर किसी से कहने-सुनने की जरूरत नहीं है।...भाषण जारी था, यह समाधान रहस्य लिए लौट आया। अब समस्याओं के समाधन गीता में खोज रहा हूं।
० डॉ. नीरज दइया
 

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