30 जनवरी, 2017

सर्वश्रेष्ठ वाद - अवसरवाद

जकल जहां देखो वहां विकल्पों के वितान खुल गए हैं। बाजार में कोई छोटी सी चीज लेने जाते हैं तो बहुत देर लगती है। कारण यह कि कौनसी लें, नहीं लें यह फैसला कैसे करें। इसमें समय लगता है। तेल, साबुन, क्रीम से लेकर गेहूं, चावल और दाल आदि सभी चीजों का यही हाल है। तेल लेना है तो कौनसा तेल लें? साबुन तो कौनसा साबुन लें? बाजार में हर वस्तु के अलग-अलग ब्रांड में उपलब्ध है। विज्ञापनों का जादू ऐसा कि हमें हमारी पसंद बार-बार बदलने पर मजबूर करते हैं। हमें पूरी तरह से भ्रमित किया जा रहा है। असल में विकल्प होते ही भ्रमित करने के लिए हैं। परीक्षाओं में प्रश्नों के उत्तर में चार-पांच विकल्प दिए होते हैं, और सही उत्तर छांटने बैठते हैं तो प्रायः सभी सही लगते हैं। ऐसे में सवाल यह है कि सर्वश्रेष्ठ और सही का चुनाव कैसे किया जाए?
           आवश्यकता आविष्कार की जननी है और इसी आवश्यकता के बल पर एक बार फिर आविष्कार हो गया है। अब इसे आविष्कार माने या नहीं माने, आपकी इच्छा। सभी अवसरों पर सर्वश्रेष्ठ अवसरवादिता है। वादों और कसमों में अवसरवाद बेमिशाल है। मान लें कि आपको तेल लेने जाने का अवसर मिलता है। कौनसा तेल लेंगे यह महत्त्वपूर्ण नहीं है, महत्त्वपूर्ण है कि किस अवसर के लिए तेल लेंना है। अवसर ही महत्त्वपूर्ण होता है। अगर दफ्तर में साहब को तेल लगाना है, तो इंजन-छाप लेना चाहिए। पत्नी ने मंगवाया है अपनी टांग दूर रखें, और जो जैसा कहा गया है वैसा ही तेल घर लें जाएं। आप अपनी बुद्धि का प्रयोग बिल्कुल नहीं करें। यह सदा याद रखें कि आपकी पत्नी आपसे अधिक बुद्धिमान है। अगर आप दुकानदार हैं और ग्राहकों के लिए तेल लें रहे हैं तो अवसरवाद कहता है कि नकली तेल खरीदें, जो सस्ता और जल्दी मिलता है। इससे आपको और ग्राहकों दोनों को फायदा होगा। सारे दुकानदार जब नकली और कम कीमत वाला तेल, बड़ा लाभ कमाते हुए बेच रहे हैं तो अवसरवाद कहता है कि आपको देश और जनता की चिंता बिल्कुल नहीं होनी चाहिए। साबुन और क्रीम में मामले में अवसरवाद कहता है कि हाथी के दांत सिद्धांत यहां अनुकूल रहेगा। अगर कहीं जा रहे हैं तो ब्रांड में समझौता नहीं करें। तेल, साबुन और क्रीम से आपकी हैसियत का पता चलता है। गेहूं, चावल और दाल तो पेट में चले जाते हैं और फिर दिखाई नहीं देते। क्या खाया-पीया यह कोई नहीं पूछता। हां, कौनसा तेल लगाया, किस साबुन का उपयोग किया और क्रीम कौनसी इस्तेमाल करते हैं... यह चर्चा कभी भी हो सकती है। अगर नहीं हो तो आपको करनी चाहिए। बिना पूछे ही बताएं कि आप क्या क्या और कौनसा-कौनसा ब्रांड इस्तेमाल करते हैं। अवसरवाद सिद्धांत के अनुसार दिल खोल कर खूब दिखावा करो। दिखावा करने से ही अवसर मिलते हैं। अवसर पर दिखावा करने से ही आपकी प्रतिभा की पहचान होगी। अगर आप महिला है फिर तो कहने ही क्या। यहां अवसरवाद का कहना है कि आपको हर अवसर मिल सकता है। अपने लटके-झटके और दांत दिखाने के साथ-साथ आधुनिक होने का लबादा ओढ़ लें। पुराने विचार और मूल्यों को बीती सदी की बातें कहते हुए छोड़ देना है। पंच काका कहते हैं कि अवसरवाद का मौलिक जन्मदाता हर कोई बन सकता है। जरूर बस इतनी है कि अपने स्वाभिमान और सिद्धांतों को भूल जाओ और अवसर के लिए गधा बनना पड़े तो भी चूको मत।
० नीरज दइया 

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