15 जनवरी, 2017

बाबा जी के चेलों, खूब खाओ बैंगन

बीबीसी ने हड़प्पा सभ्यता के बैंगन का खुलासा क्या किया, हमारे सामने चार हजार साल पुराने खट्टे-मीठे बैंगन का इतिहास जवान हो गया। पंच चाचा पूछ रहे हैं- आदि-आचार्य श्री बैंगनाचार्य ने वर्षों पहले बैंगन खाने पर प्रतिबंध लगया था, मगर क्यों?
    मैंने कहा- मुझे नहीं मालूम ये आदि आचार्य कौन थे और उन्होंने ऐसा प्रतिबंध भी लगया था। आप जानते हैं तो बताएं। मैं तो बस इतना जानता हूं कि मुझे बैंगन से परहेज नहीं है। वैसे अधिक पसंद नहीं करता हूं। पंच चाचा मूड में आ गए, बोले- भतीजे, लोग कहते हैं बै-गुन, यानी बिना गुन था। नासमझ है, देखते ही नहीं कि बैंगन के सिर पर ताज है। वह राजा है। हींग और लहसुन से तैयार करो बैंगन का सूप तो पीने से पेट फूलना, गैस, बदहजमी व अपच जैसी बीमारियां नहीं होती। भुने हुए बैंगन को खाओ तो कफ निकल कर खांसी ठीक कर देता है। भुने हुए बैंगन में शक्कर डालकर खाली पेट खाओ एनीमिया दूर। स्किन कैंसर, ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर, दिल के रोगियों के लिए भी बैंगन फायदेमंद है। तुमको पता है इसमें निकोटिन होता है और स्मोकिंग छुड़ा सकता है। भैया जो लोग गंजे होते जाते हैं वे अगर बैंगन खाए तो बालों का झडऩा बंद हो सकता है। बैंगन कॉलेस्ट्रोल कंट्रोल करता है।
    मैंने कहा- चाचा जी, मैं बोरी एक बैंगन ला देता हूं। अगर आप जगह-जगह बांटना चाहते हैं तो। मुझे नहीं सुनना बैंगन पुराण। मैंने पहले ही कह दिया मुझे अधिक पसंद नहीं है। जब घर में बनता है मैं खा लेता हूं। आप तो यह बताएं कि वह प्रतिबंध कैसे लगा था।
    पंच चाचा बोले- ये आदि आचार्य बैंगनाचार्य लोक में बाबाजी के नाम से प्रसिद्ध है। ये वे बाबाजी थे जिन्होंने अपने सभी चेलों को बैंगन खाने से मना किया था और खुद खाते थे। मैंने बीच में प्रतिवाद किया- यही तो बताएं कि खुद खाते थे तो दूसरों को मना क्यों किया था।
    पंच चाचा जरा परेशानी में बोले- वर्षों से बाबाजी को बैंगन बहुत पसंद थे, वे बड़े चाव से खाते थे। लेकिन उनको खुद याद नहीं, कब उन्होंने चेलों को बैंगन खाने से मना किया था। भेड़ चाल है किसी चेले को बैंगन पसंद नहीं था तो उस ने चर्चा फैला दी कि बाबाजी ने मना किया है। या ऐसा भी हो सकता है कि गुरुकुल में बैंगन कम आए होंगे और रसौइया जरा शातिर होगा। उसने सोचा- बैंगन कम है सो उसने चालाकी दिखाई और बोल दिया बाबाजी ने सब चेलों को बैंगन खाने से मना किया है। एक बार कोई बात चल निकलती है फिर उसे रोकना मुश्किल होता है। हुया यह कि आज वर्षों बाद किसी दुखीराम नामक चेले ने प्रतिवाद किया तो मामला समझ में आया।
    वर्षों बाद बाबाजी को मालूम चला कि चेले भी बैंगन खाना चाहते हैं। फिर क्या था उन्होंने फेसबुक स्टेटस लिखा है- बाबा जी चेलो, खूब खाओ बैंगन। बीच में मैंने तपाक से सवाल किया- पंच चाचा, ये बाबाजी अब तक जिंदा है और फेसबुक यूजर है? दुखीराम जैसे चेले मूर्ख है। अगर बैंगन ही खाने थे तो बाबाजी से बिना पूछे भी खा सकते थे। चाचाजी, आपकी कहानियों में काल-साम्य नहीं दिखता।
    पंच चाचा के चेहरे पर कुटिल मुस्कान आई। बोले- ये बैंगन जितना सीधा दिखता है उतना साम्य में नहीं आता। कई किस्से मशहूर है। एक बार अकबर के सामने बीरबल ने बैंगन की तारीफ कर दी और दूसरे दिन भद्द, तो अकबर ने पूछा- बीरबल जनाब, ऐसा क्यों? बीरबल ने जबाब दिया- जहांपनाह, कल बैंगन खाया, बहुत अच्छा लगा। रात बैंगन ने खराबी कर दी। कल वाली बात फिर दोहरा कैसे सकता हूं।
० नीरज दइया
naya arjun 15.01.2017

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