27 दिसंबर, 2016

संपर्क बढ़ाने पर ध्यान दें

ज चारों तरफ संपर्क का ही बोलबाला है। यह ऐसी बोलती हुई बाला है कि सब इसके दीवाने हैं। इसके बिना कहीं कुछ नहीं होता। हमारे माननीय प्रधानमंत्री ने जन-जन से संपर्क किया और ‘अबकी बार मोदी सरकार’ से जो कुछ किया, वह सब के सामने है। कहने वाले बेशक कुछ भी कहते रहे, पर सच्चाई यह है कि बिना संपर्क के कुछ भी नहीं हो सकता। चुनाव तो सदा पार्टियों का होता रहा है। यह तकनीकी कमाल था कि संपर्क से किसी पार्टी का पर्याय एक उम्मीदवार बना। यह संपर्क की जीत है। अस्तु यह सूत्र के रूप में लिखा जाना चाहिए कि संपर्क बढ़ाने पर ध्यान देंगे तो सिद्धि-प्रसिद्धि मिलेगी। संपर्क बनाने और साधने के अनेक तरीके हैं। यह बहुत सरल है। ठीक वैसे ही जैसे मोबाइल में किसी का नम्बर डायल करते हैं। आपको इंटरनेट फेंडली होना है। अपने काम के आदमी का मुखड़ा सामने आते ही उसका खास नंबर प्रेस कीजिए। नहीं समझे, अरे भाई बिना नंबर तो किसी से बात नहीं हो सकती है। सबसे पहले नंबर पता कीजिए कि किसका क्या नंबर है। गलत नंबर डायल करना खतरनाक हो सकता है। किसी को चापलूसी पसंद है, और किसी को थोड़ी-थोड़ी। पर कुछ ऐसे भी हैं जिनको चापलूसी, बस चापलूसी के नाम से नापसंद है। आप अपनी चापलूसी का नाम बदल कर ही उनको खुश कर सकते हैं। मान लिजिए कि आप एक आम आदमी हैं। कोई छोटी मोटी नौकरी करते हैं। देखिए आपके जीवन की फ्रिक करने वाले आपकी बीमा करना चाहते हैं। बैंक आपको लोन देना चाहता है। आप गाड़ी और बंगला क्यों नहीं खरीदते हैं? आपके पास नौकरी है और एक बंधी बंधाई पगार है। उसे लूटने के लिए बहुत से चापलूस आपसे संपर्क करना चाहते हैं। बिना नौकरी के ये सब सुविधाएं नहीं मिलने वाली। आप ने क्या सोच रखा है कि हम बहुत भले हैं। हम में संवेदनाएं कूट-कूट कर भरी हुई है। बिल्कुल नहीं। हम ऐसे हैं कि रास्ते पर चलते हुए किसी को लिफ्ट नहीं देते हैं। किसी का क्या भरोसा? हर काम हम बस केवल अपने फायदे के लिए करते हैं। गली में स्वच्छता अभियान चला तो प्रेस वाले फोटो लेने आए। सबसे पहले सफाई पसंद के रूप में हम ही कूदे थे। झाडू लेकर फोटो के लिए दौड़ना, मन को कितना सकून देता है। वह एक ऐतिहासिक दिन था। हमने झाडू हाथ में लिया था। गली के नेता जी के साथ हमारी शानदार मुस्कान और हंसी का कोई मुकाबला नहीं कर सकता है। हम सही वक्त पर सही नाटक करते हैं। मुखौटा लगाते हैं।
संपर्क ही वह मुखौटा है, जिसे देखते ही बड़ी-बड़ी बीमारियां ठीक हो जाती है। मान लिजिए आपका पेट गैस से भरा है। बिना किसी से बोले तो आपकी यह बीमारी बढ़ती जाएगी। जन संपर्क होगा तभी तो बोल-बतिया सकेंगे। दीवारों से तो बातें करेंगे नहीं ना। इसलिए कहा कि संपर्क से हर बिगड़ा काम बन जाता है। कोई फाइल अटकी है या भटकी है, तो उसका एक ही तरीका है- संपर्क। हमारे राजस्थान में तो सम्पर्क का कुछ अधिक ही महत्त्व स्वीकार करते हुए जन सामान्य की शिकायतों को दर्ज करने और समस्याओं के निराकरण हेतु अभिनव प्रयास का नाम ही राजस्थान संपर्क रख दिया गया है। यहां बिना कार्यालय में उपस्थित हुए समस्याओं को ऑनलाइन दर्ज करने की सुविधा दी गई है। संपर्क की महिमा है कि जिलों में संपर्क कार्यालय खुले हैं। हमारी समस्याओं को हल करने के लिए सरकार ने भी संपर्क को चुना है। पंच काका का मानना हैं कि आज के युग में संपर्क ही लोकप्रिय बला है। मुझ से वे अक्सर कहते हैं कि केवल लिखने-पढ़ने से कुछ नहीं होगा। किसी रचना को ढंग की जगह छपवाना है, तो संपर्क सही करो, फिर देखो कमाल। काका के कहने पर मैं संकल्प लेता हूं कि अब संपर्क बढ़ाने पर ध्यान दूंगा।
 ० नीरज दइया
 

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