12 नवंबर, 2017

पांच कविताएं ० नीरज दइया


अंजाम

सत्य वचन है श्रीमान
यूज एंड थ्रो आइटम हूं मैं
यह बाजार है श्रीमान
मुझे यूज करें....

जानता हूं मैं
मेरा अंजाम
फिर भी कहता हूं-
श्रीमान! यूज करें मुझे..

‘थ्रो’ से पहले
क्या यह स्मृति काफी नहीं
‘यूज’ किया गया मैं
श्रीमान के द्वारा!
००००

अधूरी कहानी

चलता जा रहा हूं मैं
जैसे चलती है पेन की रिफिल
लिखता जा रहा हूं मैं
जैसे कोई कहानी....

और एक दिन
यानी किसी आखिरी दिन
पेन से नहीं लिख सकूंगा मैं
कैसे करूंगा पूरी कहानी...
००००

निवेदन

जीवन के दो छोर हैं-
‘यूज’ और ‘थ्रो’।

मेरे ‘यूज’ में तुम साथ रहे,
‘थ्रो’ से ठीक पहले
नजर बचा के निकल जाना
थोड़ी देर के लिए ही सही
मैं तुम्हें दुखी नहीं देख सकूंगा।
००००

एक जैसी बातें नहीं

‘यूज’ किया तुमने मुझे
‘यूज’ हुआ मैं तुम्हारे द्वारा
दोनों एक जैसी बातें नहीं है।

तुमने मुझे ‘थ्रो’ किया
मैं ‘थ्रो’ हुआ तुम्हारे द्वारा
दोनों एक जैसी बातें नहीं है।

तुम्हें भ्रम है
मुझे भी भ्रम है
दोनों एक जैसी बातें नहीं है।

तुमने मुझे प्रेरणा दी
मैंने तुमसे प्रेरणा ली
दोनों एक जैसी बातें नहीं है।
००००

तिल भर जगह
 
किसे बचा कर रखूं
क्या बचा कर रखूं
रखने को कोई कोना नहीं मेरा
यहां तिल भर जगह भी नहीं है मेरी
सब कुछ है तुम्हारा....
००००
राजस्थान पत्रिका समूह के प्रतिष्ठित हिंदी दैनिक ‘डेली न्यूज़’, जयपुर के 12-11-17 रविवारीय साहित्य पृष्ठ 'हमलोग' में
 

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