घर वह घर नहीं है
पता तो वही है
घर वह घर नहीं है
जो था आपका
पिताजी !
नाम तो वही है
भाई पर भाई नहीं है
जो था आपके रहते
पिताजी !
घर जिस में आप रहते थे पिताजी।
भाई जिस में मैं था पिताजी।
पता ही नहीं चला
कव कैसे क्या हो गया...।
पुराने घर को गिरा कर
खड़ा किया नया घर।
पिताजी ! आपने बनवाया
वह घर अब नहीं है।
भाई कहता है- पुश्तैनी घर है।
इस घर के बारे में
अब मैं क्या कहूं पिताजी ?
००
कोई बात नहीं !
बहुत पुरानी हो गई
फिर भी अपनी मुस्कान लिए
दीवार पर सजी है-
तश्वीर पिताजी की।
सुबह-सवेरे वे रोज
भरते हैं मुझ में नया जीवन
घर से निकते समय देखता हूं उन्हें
जीवन की भागा-दौड़ में
सोचता हूं- इस रविवार को
तश्वीर साफ करूंगा।
काफी महीने हो गए
वह रविवार नहीं आया,
मैं ग्लानि से भरता हूं
फिर भी दीवार पर-
तश्वीर में पिताजी
मुस्कान लिए कहते हैं-
कोई बात नहीं !
००
अधूरी कविताओं के बारे में
मुझे कविताओं को सौंपा पिताजी ने
पर नहीं सौंपी मुझे
आपनी कविताएं।
कई कविताएं
जो सहेजती है मुझे
और जिन्हें सहेजता हूं मैं
नहीं लगी अच्छी
क्यों कि वे नहीं हो सकी
पूरी!
उन कविताओं के लिए
मेरा बड़ा दुख है
कि वे रह गईं हैं अधूरी।
जब-जब मैं बतियाता हूं उनसे
वे रोती हैं, साथ मेरे
उनकी पीड़ा परखने वाला
मेरे अतिरिक्त
कोई नहीं है।
कोई नहीं है अन्य !
००
पता तो वही है
घर वह घर नहीं है
जो था आपका
पिताजी !
नाम तो वही है
भाई पर भाई नहीं है
जो था आपके रहते
पिताजी !
घर जिस में आप रहते थे पिताजी।
भाई जिस में मैं था पिताजी।
पता ही नहीं चला
कव कैसे क्या हो गया...।
पुराने घर को गिरा कर
खड़ा किया नया घर।
पिताजी ! आपने बनवाया
वह घर अब नहीं है।
भाई कहता है- पुश्तैनी घर है।
इस घर के बारे में
अब मैं क्या कहूं पिताजी ?
००
कोई बात नहीं !
बहुत पुरानी हो गई
फिर भी अपनी मुस्कान लिए
दीवार पर सजी है-
तश्वीर पिताजी की।
सुबह-सवेरे वे रोज
भरते हैं मुझ में नया जीवन
घर से निकते समय देखता हूं उन्हें
जीवन की भागा-दौड़ में
सोचता हूं- इस रविवार को
तश्वीर साफ करूंगा।
काफी महीने हो गए
वह रविवार नहीं आया,
मैं ग्लानि से भरता हूं
फिर भी दीवार पर-
तश्वीर में पिताजी
मुस्कान लिए कहते हैं-
कोई बात नहीं !
००
अधूरी कविताओं के बारे में
मुझे कविताओं को सौंपा पिताजी ने
पर नहीं सौंपी मुझे
आपनी कविताएं।
कई कविताएं
जो सहेजती है मुझे
और जिन्हें सहेजता हूं मैं
नहीं लगी अच्छी
क्यों कि वे नहीं हो सकी
पूरी!
उन कविताओं के लिए
मेरा बड़ा दुख है
कि वे रह गईं हैं अधूरी।
जब-जब मैं बतियाता हूं उनसे
वे रोती हैं, साथ मेरे
उनकी पीड़ा परखने वाला
मेरे अतिरिक्त
कोई नहीं है।
कोई नहीं है अन्य !
००

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