03 फ़रवरी, 2018

बुलाकी शर्मा के सृजन सरोकार

इस पुस्तक में राजस्थान के परिचित कथाकार व्यंग्यकार बुलाकी शर्मा के व्यक्तित्व तथा कृतित्व को केंद्र में रखकर नीरज दइया ने अपना समीक्षात्मक आकलन प्रस्तुत किया है। इस आकलन में उनके परस्पर संबंधों तथा निजी जीवन के अनुभवों के साथ ही संस्मरणपरक छवियां भी अंकित की गई है। व्यक्ति के समाज, समय, संस्कृति तथा परिवेश से जुड़ाव की बदौलत ही उसके सर्जनात्मक व्यक्तित्त्व तथा कृतित्त्व की भूमिका निश्चित होती है। इससे यह भी पता चलता है कि कोई भी व्यक्ति बतौर एक रचनाकार हमेशा अपने भीतर सतत आत्म-संघर्ष तथा आत्ममंथन की प्रक्रिया से गुजरता रहता है। रचनाकार के तौर पर बुलाकी शर्मा को समझने की दृष्टि से इस पुस्तक का महत्त्व स्पष्ट है। व्यंग्यकार तथा कथाकार के रूप में बुलाकी अपने विचार खुलकर प्रकट करते हैं और उनके रचनाकार का यह अकुंठित रूप से उन्हें सार्थक रचनाकार के तौर पर स्थापित करता है।
- मधुमती टीम ( राजस्थान साहित्य अकादमी, उदयपुर)

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