21 अगस्त, 2017

दो बाल-कविताएं ० नीरज दइया

खाऊंगा

आलू नहीं खाऊंगा
मटर नहीं खाऊंगा
खाना ही है मुझको
तो रसगुल्ला खाऊंगा।

मिर्ची नहीं खाऊंगा
बेंगन नहीं खाऊंगा
खाना ही है मुझको
तो मालपुआ खाऊंगा।

केला नहीं खाऊंगा
आम नहीं खाऊंगा
खाना ही है मुझको
तो ब्रेड-फकोड़ा खाऊंगा।
००

भुजिया का स्कूल
बीकानेरी भुजिया
कैसे नबंर वन आता
कोई जरा समझा दो...

दादाजी लाते-
दो नबंर भुजिया

दादीजी मंगवती-
तीन नंबर भुजिया

ऐसे कितने-कितने
होते भुजिया के नंबर

ठीक पढ़ते नहीं भुजिया
अपने स्कूल में
तभी तो पाते है-
इतने कम नंबर।
००

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