‘पेपर लीक’ यह दो शब्द पढ़ते ही खलबली मच जाती है। विगत वर्षों से पेपर देदे कर लगातार असफल होने वाले बेरोजगारों के मुंह से भद्दी गालियों की रेलगाड़ी छूटती है। उनके पिताओं को पूरी सरकार और व्यवस्था नाकारा लगने लगती है। माताएं कहती हैं- ‘हमारे समय तो ऐसा नहीं होता था।’ दादा-दादी अपने आशीर्वाद को रिपेयर करते हुए कहते हैं- ‘कोई बात नहीं बेटा, फिर तैयारी कर। भगवान सब ठीक करेगा।’ सत्ता पक्ष वाले इन दो शब्दों से बेहद दुखी होते हैं तो विपक्ष वाले लड्डू बाँटने की तैयारी में लग जाते हैं। इन सब से अलग मेरे जैसा कोई लेखक इन शब्दों को चेलेंज देता हुआ इनके अर्थ में परिवर्तन कर ‘होली अंक’ के लिए रचना तैयार करने की सोचता है!
पेपर का मतलब केवल परीक्षा का प्रश्न पत्र नहीं होता। प्यारे, जिसे प्रतिदिन आप पढ़ते हैं- अखबार वह न्यूज पेपर कहलता है और लोग उसे केवल पेपर कहते हैं। मैं जिस कागज पर लिख रहा हूं, उसे भी पेपर संज्ञा से सुशोभित किया जाता है। मैं यहां किसी अज्ञात पेपर की बात कर रहा हूं, जिसे होली में सालियों ने जीजाजी के लिए तैयार किया था। नए नए जीजाजी को अपनी नई नवेली सालियों के संग होली खेलने-खिलाने का आनंद रसगुल्लों के स्वाद से भी ज्यादा होता है। रंग और गाल तो वही होते हैं, जो पिछली होली में थे। किंतु इस बार के रंग को छूने वाले कोमल-कोमल हाथों से और एक दूसरे के गालों तक पहुंचने के लिए जो खुशी होती है वह निराली होती है। जैसे खुशी खुद मचलती-इठलाती दिखाई देती है। सालियों में उत्साह-उमंग की मात्रा चरम को पार करती देखी जा सकती है। जीजाजी के मन में लड्डू फूटते हैं कि कैसी कैसी कितनी सालियां मिलेंगी। दोनों पक्षों में बस विचारों की तेज आंधियां चलती है। जब मौका मिलेगा तो उनके साथ ऐसा करेंगे, वैसा करेंगे और भी ना जाने कैसा-कैसा करेंगे।
बडी, मझली और छोटी सालियों के संग आस-पड़ौस की लड़कियों और बहुओं ने भी जीजाजी की सालियों की संख्या में इजाफा कर दिया। अब जीजाजी के ठाठ हो गए। एक साली ने कहा- ‘जैसे ही जीजू गेट पर पहुंचेंगे, मैं छत से रंग की बालटी उन पर उडेल दूंगी।’ दूसरी बोली- ‘तेरे नंबर से पहले तो मेरा नंबर आएगा। मैं अपनी बॉलकनी से रंग के गुब्बारों से जीजाजी और उनके दोस्तों पर धावा बोल दूंगी और मेरा पिंटू अपनी पिचकारी से उन पर रंग बरसाएगा।’ फिर क्या था सब ने बारी बारी से अपने-अपने कामों को बड़े जोश के साथ वर्णित किया- ‘मैं दरवाजे के पीछे छिपी रहूंगी, जैसे ही भीतर आएंगे पीछे से उन पर जबरदस्त रंग डाल कर पूरा रंग दूंगी।’ एक के बाद एक रंगारंग कार्यक्रम फिक्स हुए। उनको क्या-क्या खियाला-पिलाया जाएगा। उनके दोस्तों के साथ कैसे-क्या बात होगी। भांग के भजिया से रंगीन काजू कतली और पान-सुपारी तक की सारी बातों को एक फुलस्कैप कागज पर सुंदर लिखावट के साथ सालियों द्वारा लिखी गई।
काश! सुंदर सालियों की हसरतें पूरी हो पाती। जीजाजी का संदेश आ गया कि उनका रीट का पेपर बहुत अच्छा हुआ था पर पपेर लीक होने से बहुत उदास है। इसलिए इस बार होली नहीं खेलेंगे। आग लगे इस पेपर लीक को पिछले सालों होली को कोरोना खा गया इसबार यह लीकेज खा गया। इस स्टोरी की के असली सूत्रों का खुलासा करें तो सुंदर लिखावट के साथ पूरी योजना जिस पेपर पर लिखी गई थी उसे जीजाजी की एक प्रिय साली साहिबा ने उनको वाट्सएप कर दिया तो वे नाराज हो गए। उनको लगा कि पेपर लीक करने वाले भरे पड़े हैं। वे नहीं आए। उन्होंने सुगुन के तौर पर अपनी प्रिय सालियों को तिलक लगा अपना फोटो भेजकर होली की शुभकामनाएं देकर इतिश्री कर दी।
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