17 सितंबर, 2016

कहां है उल्लू

पंच काका कह रहे हैं कि सच को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार को टैक्स में अतिरिक्त राहत देनी चाहिए और झूठ पर टैक्स लगाना चाहिए। जिससे लोग मन की बात कह सकें। सुना है कि भारत देश में वर्षों से बिना मन की बातें ही होती थी, और अब मन की बातें होने लगी है।
भारतीय जन-मानस के सामने गोपियां का उदाहरण था। गोपियों ने उधो जी को कह दिया था- उधो, मन न भए दस बीस। एक हुतो सो गयौ स्याम संग, को अवराधै ईस। पर हमारी त्रासदी की मन की यह बात आज तक हमने मन में ही रखी और अब वह समय आ गया है जब मन की बात कहें। एक कारण मन की बात मन में ही रखने का यह भी माना जा रहा है कि हमारे देश के किसी प्रधानमंत्री ने पहले कभी मन की बात की ही नहीं। यह देश में पहला अवसर है कि मन की बात प्रधानमंत्री जी करने लगे हैं।
यह मैं नहीं कहता हूं पर पंच चाचा कुछ बोलने में मुंहफट है। वे कहते हैं और यह उनका ही यहां तक मत है कि भारत देश इतनी समस्याओं से घिरा है कि भारतीय राजनीति में जो आता है वह अपना मन मगरमच्छ और बंदर की कहानी जैसे किसी पेड़ पर नहीं वरन तहखानों के सात तालों में बंद कर के ही आता है। भैया बच के रहना, ऐसे ही करना पड़ता है। जनता के दुख-दर्द का यह आलम है कि उससे कोई मन कितना ही चंगा-भला हो पागल हो जाएगा। कोई एक-दो या दस-बीस समस्याएं हों तो कोई सुने और गुने भी। यहां तो जनता-जनार्दन के पास थोक में समस्याओं का अंबार है, उसे बस हां-हूं कर सुनो और चलता करो। किसी को बस जनता को उल्लू बनाना आना चाहिए। उल्लू बनाना सीख लेने में ही फायदा है।
यहां समस्या कोई एक हो तो देखें भी कि क्या सच है और क्या झूठ है। यहां तो सच-झूठ इतना गड़मड़ है कि कुछ मालूम ही नहीं चलता है। यह तो सुनने-सुनाने और समझने-समझाने की कला है कि कोई सच को झूठ और झूठ को सच साबित कर देता है। अब टैक्स की ही बात करें तो आयकर बचाने के लिए कितना सच-झूठ और क्या-क्या होता है। बाकायदा आयकर बचाने और आयकर की चपत लगाने वाले अपनी अपनी दुकानें खोलें बैठै हैं। यह पंगा सब छोटी-मोटी नौकरी करने वालों के लिए है। असली आयकर दाताओं को तो मालूम है कि लक्ष्मी जी की सवारी उल्लू है, और वे किसी को भी लक्ष्मी के बल पर उल्लू बना कर अपनी लक्ष्मी का वाहन बनाने से नहीं चूकते। ऐसे ही ज्ञानी तय करते-कराते हैं कि सरकार को किसे टैक्स में अतिरिक्त राहत देनी चाहिए और किस पर टैक्स अधिक लगाना चाहिए।
आज के युग में ऐसा कौन उल्लू होगा जिसे लक्ष्मी से प्यार नहीं हो। पर लक्ष्मी भी बेचारी क्या करे? इतनी जनता से तो एक साथ तो प्यार कर नहीं सकती, इसलिए वह छांट लेती है कि कौन उल्लू है और कौन उसकी सवारी को यहां से वहां पहुंचाने में काम आएगा। वह मन की बात हर किसी से नहीं करती। हमारे प्रधानमंत्री जी ने चुनाव जीतने के लिए मन की बात कही कि सभी भारतीयों के खातों में काल धन का एक हिस्सा आएगा। पर हाय रे हमारी किस्मत। इतनी अच्छी क्यों है? हमारी लक्ष्मी जानती है कि हमने वर्षों से उसकी पूजा की है। इसलिए काली लक्ष्मी को बैंक खातों में आने ही नहीं दिया। जिस किसी ने ऐसी उम्मीद की उल्लू बना दिया। यही कारण है कि सभी उल्लू लक्ष्मी का इंतजार करते हैं।
मुझे लगता है हमारे चारों तरफ उल्लू ही उल्लू है। जो धन के लिए आंखें फाड़ते हैं। ये पागल होकर घूमने वाले हर दूसरे को उल्लू समझते हैं। चाहते हैं हर कोई इनके लिए लक्ष्मी जी का वाहन बने, और उनको ले आए। आश्चर्य तो इस बात का है कि ये मन की बात तो करते हैं, पर पूछते हैं- ‘कहां है उल्लू?’
- नीरज दइया  
 

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