साहित्यकार बोले- राजस्थानी भाषा के लिए कवि कागद के प्रयासों से युवा वर्ग ले प्रेरणा
सूरतगढ़| ओमपुरोहित कागद राजस्थानी व हिंदी जगत के लोकप्रिय रचनाकार थे। उन्होंने नवोदित रचनाकारों के प्रोत्साहन...
सूरतगढ़|
ओमपुरोहित कागद राजस्थानी व हिंदी जगत के लोकप्रिय रचनाकार थे। उन्होंने
नवोदित रचनाकारों के प्रोत्साहन के लिए किया गया ‘थार सप्तक’ का संपादन
राजस्थानी साहित्य के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखे जाने योग्य है।
यह बात वरिष्ठ समालोचक डॉ. नीरज दैया ने गुरुवार को ग्रामोत्थान स्कूल
प्रांगण में कागद जयंती समारोह में बोलते हुए कही। उन्होंने कहा कागद की
कविताएं शीर्षक से पांडुलिपि तैयार की है, जो जल्द ही पाठकों तक पहुंचेगी।
समारोह में संभाग के वरिष्ठ रचनाकार शामिल हुए। साहित्यकार मोहन आलोक की
अध्यक्षता में हुए समारोह में कागद की धर्मप|ी भगवती पुरोहित अतिथि के रूप
में मौजूद थीं। डॉ. हरिमोहन सारस्वत ने कागद की राजस्थानी व हिंदी रचनाओं
का वाचन किया। महेंद्रसिंह शेखावत ने स्मृति में रचित कविता पढ़ी। वक्ताओं
ने कागद के रचनाकर्म के साथ उनके व्यक्तित्व पर संस्मरण सांझा किए। पत्रकार
करणीदानसिंह राजपूत, संदेश त्यागी, डॉ. मदनगोपाल लड्ढा, राजूराम
बिजारणियां, नवनीत पांडे, हरीश हैरी, सतीश छींपा, नरेश मेहन ने कागद के
व्यक्तित्व के विभिन्न पहलू संस्मरण के माध्यम से बताए। साहित्यकार मोहन
आलोक ने कहा कि राजस्थानी भाषा की मान्यता के लिए कागद ने अनूठे प्रयास किए
थे, जिनसे प्ररेणा लें। भगवती पुरोहित ने आयोजन के लिए आभार जताते हुए
कागद की स्मृति में रचित कविताएं प्रस्तुत की। कागद पुत्री भारती व अंकिता
पुरोहित भी समारोह में मौजूद थीं। समारोह में डॉ. अरूण सहरिया, सुरेंद्र
सुंदरम, विनोद वर्मा, प्रहलादराय पारीक, आशा शर्मा, सुमन शेखावत, जयश्री
सारस्वत, दिनेश चंद्र शर्मा, लाजपतराय भाटिया, नरेश रिणवा, नरेश वर्मा,
अनिल धानुका, रमेश माथुर शामिल हुए। संचालन आकाशवाणी के वरिष्ठ उदघोषक
राजेश चड्ढा ने किया। गोपीराम गोदारा ने आभार जताया।


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