1.
प्रेम चाहिए पृथ्वी पर
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मेरे खून में- प्रेम है
आदम और हवा का
उसी प्रेम की असंख्य बेलें
फैली हैं- पूरी पृथ्वी पर,
जुड़ा हुआ हूं मैं
जुड़ी हुई हैं- पीढ़ियां सारी।
उस समय के साक्षी-
सूरज, चांद और सितारे
कहते हैं सारे
प्रेम चाहिए पृथ्वी पर।
हवा में चंचलता है
उसी से थिरकती है पृथ्वी
चकित है आकाश।
००००
2.
यह कवि की कल्पना नहीं
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यह कवि की कल्पना नहीं
शुद्ध यथार्थ है-
लाल पान जैसा ही होता है दिल।
वह दिखाया नहीं जा सकता
छलिया होता है वह,
ईश्वर के सारे छल
छिपाए रखता है-
अपने भीतर।
कभी धड़कता है- धीरे-धीरे
कभी जोर-जोर से
और कभी रुक जाता है-
अचानक!
विज्ञान के सारे शिक्षकों ने
देश दुनिया के सारे डॉक्टरों ने
बहरूपिये दिल को जाना
मगर मान नहीं
जैसे कवि ने माना
अगर मान लेते
वे कवि हो जाते!
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3.
खरोंच
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हमारा दिल
एक पहेली है अबूझ
सब कुछ समझा जा सकता है
सिवाय दिल के।
किसी नियम या सूत्र में
बांधा नहीं जा सकता है-
प्रेम।
उम्र और देश काल की सीमाएं भी
बांध नहीं सकती उसे।
अनेक बार मैंने कहा दिल से-
अभी समय है सही
किया जा सकता है प्रेम
किंतु स्थिर रहा वह अपनी जगह
और एक दिन अचानक
करने लगा- नृत्य।
बेमौसम बिना बादल
कर सकता है वह नृत्य
मैंने पाया
इस नृत्य में
टूटा नहीं दिल
बस हल्की सी खरोंच लगी।
००००
4.
यकीन कीजिए
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प्रेम जैसा द्रव्य
दूसरा कोई नहीं है
पूरी पृथ्वी पर।
किसी सारणी में
नहीं है उसका
तयशुदा स्थान।
वह अवस्थाओं से परे
किसी भी अवस्था में
बदलता है अवस्था,
छोड़ सकता है-
अपना रंगकिसी भी रूप में
उसे दाग या धब्बा मानने वालों की कमी नहीं
पर यकीन कीजिए-
प्रेम जैसा द्रव्य
दूसरा कोई नहीं
पूरी पृथ्वी पर....।
००००००
5.
लौटना संभव नहीं
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जब-जब भी मैं
पहुंचा हूं-
प्रेम के परिसर में
लौटा नहीं पूरा
संभव नहीं- लौटना।
हरेक यात्रा का
अपना समय होता है
नहीं लौटता समय भी
चलता रहता है-
आगे और आगे
साथ-साथ समय के
चलते हुए मैं
देख रहा हूं- लगातार
पीछे और पीछे
जानते हुए-
कि लौटना संभव नहीं....।
००००



