भुलावा
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आगे प्रेम
पीछे प्रेम
इस यात्रा के बीच
जिंदगी - एक भुलावा ।
हाथ बढ़ाते हैं
जिन्हें छूने के लिए
वो हर बार
खिसक जाते हैं चुपचाप ।
मंजिल पास लगती है
फिर भी
रह जाती हैं- दूरियां...
आगे प्रेम
पीछे प्रेम
बीच में हम-
बस प्रेम-मार्गी।
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ढाई आखर
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प्रेम को जानना
यानी पढ़ लेना
ढाई आखर-
और बन जाना पंडित।
पर जानना ही
तो अंत है,
और मुझे नहीं चाहिए
प्रेम का अंत।
इसलिए हर बार
कह देता हूं-
मुझे समझ नहीं आए
ढाई आखर,
तुम रचते रहो
मैं बांचता रहूं
अनजान अनाम सही
प्रेम में बना रहूं...
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प्रेम चाहिए... हर जगह
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मैंने कहा-
प्रेम चाहिए पृथ्वी पर।
भूलभुलैया बन गए हैं रास्ते,
हृदयों में उग आए हैं कांटे,
मनुष्यता सिसक रही है,
प्रेम चाहिए... हर जगह।
देवता प्रेम के हुए प्रसन्न,
बोले-
'प्रेम भेज रहा हूं,
कहां भेजूं इस पृथ्वी पर ?'
मैंने कहा-
मेरी पृथ्वी की अपनी सीमाएं हैं,
नक्शों में बंटी, भाषाओं में बंधी,
धर्म, जाति, रंग की दीवारों से
घिरी हुई है सारी दुनिया।
मगर नहीं हैं सीमाएं प्रेम की
वह उगता है सूरज-सा,
बरसता है बादलों-सा,
बहता है नदियों-सा
एक छोर से दूसरे तक
जहां जरूरत हो,
पहुंच जाता है वह।
तो कैसे कहूं
किस पते पर भेजो प्रेम?
किस नगर, किस जाति, किस धर्म के नाम
मांगूं मैं उसे?
नहीं,
प्रेम चाहिए हर एक कण में,
हर जीव, हर जड़, हर चेतन में।
जन-जन के मन में,
श्वास-श्वास में हो प्रेम।
संबंधों में ही नहीं,
विचारों में,
नीतियों में,
भाषाओं और पाठ्यक्रमों में
और सबसे जरूरी,
बच्चों की आंखों में हो प्रेम।
देवता मौन रहे
और मैं भी।
मौन में ही कुछ उत्तर था
शायद प्रेम अब भेजा जा चुका है।
हवाओं में घुल चुका है वह।
क्योंकि प्रेम अब पृथ्वी पर है-
और वह जीवित रहेगा
केवल तब तक,
जब तक हम प्रेम होंगे।
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सांस-सांस गाती है...
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'झीनी-झीनी चदरिया',
ओढ़ रखी है मैंने भी
तुम्हारे नाम की।
मेरी सांस-सांस
गाती है दिन-रात।
भीतर-बाहर आती-जाती
गुनगुनाती है हवा
बस एक ही आलाप....।
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कौन तय करता है
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कोई हल्की सी चिंगारी
कमाल की रोशनी बन सकती है
यह भी हो सकता है-
हो जाए उदय के साथ-
अचानक उसका अंत।
कौन तय करता है ?
जरा सी सहानुभूति
बदल जाए प्रेम में
या उसे स्वार्थ समझ
भूलने के कुचक्र में
रखा जाएगा- रौंदने के लिए
कौन तय करता है ?
घने अंधकार के बीच
सब कुछ भूल कर खुलती-
जैसे ही आँख
जग जाती - स्मृति
पेड़ की शाखाओं की तरह
सज जाता है
भीतर हरा-भरा संसार...
कौन तय करता है ?
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डॉ. नीरज दइया
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‘प्रभात खबर’ के दीपावली विशेषांक 2025 में























