डर बना हुआ है
फिर भी- जीवन चल रहा है...
भारत-पाकिस्तान, चीन-ताइवान
और रूस-नाटो के बीच
कभी भी कुछ भी हो सकता है
डर बना हुआ है
फिर भी- जीवन चल रहा है...
यह डर केवल बाहर नहीं
कुछ अधिक है- भीतर...
बाहर से अधिक है- भीतर
देश-दुनिया की बात छोड़ दीजिए-
घर में भी जारी है- शीतयुद्ध
भाई-भाई में जंग जारी है...
यह जंग नहीं तो भला क्या है...
अब खून के रिश्तों में भी
घर कर चुका- जंग
जो बहुत कोमल थे
और जो बहुत मुलायम थे
वे अब हैं- एकदम कठोर
पत्थर जैसे संवेदन-शून्य
और लोहे से भी अधिक सख़्त
बंद है कपाट!
युद्ध जारी है... निरंतर।
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06 जून, 2025
युद्ध निरंतर/ नीरज दइया
05 जून, 2025
नीरज दइया की कविताएं
अंजाम
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सत्य वचन है श्रीमान
यूज एंड थ्रो आइटम हूं मैं
यह बाजार है श्रीमान
मुझे यूज करें....
जानता हूं मैं
मेरा अंजाम
फिर भी कहता हूं-
श्रीमान! यूज करें मुझे..
‘थ्रो’ से पहले
क्या यह स्मृति काफी नहीं
‘यूज’ किया गया मैं
श्रीमान के द्वारा!
००००
अधूरी कहानी
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चलता जा रहा हूं मैं
जैसे चलती है पेन की रिफिल
लिखता जा रहा हूं मैं
जैसे कोई कहानी....
और एक दिन
यानी किसी आखिरी दिन
पेन से नहीं लिख सकूंगा मैं
कैसे करूंगा पूरी कहानी...
००००
निवेदन
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जीवन के दो छोर हैं-
‘यूज’ और ‘थ्रो’।
मेरे ‘यूज’ में तुम साथ रहे,
‘थ्रो’ से ठीक पहले
नजर बचा के निकल जाना
थोड़ी देर के लिए ही सही
मैं तुम्हें दुखी नहीं देख सकूंगा।
००००
एक जैसी बातें नहीं
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‘यूज’ किया तुमने मुझे
‘यूज’ हुआ मैं तुम्हारे द्वारा
दोनों एक जैसी बातें नहीं है।
तुमने मुझे ‘थ्रो’ किया
मैं ‘थ्रो’ हुआ तुम्हारे द्वारा
दोनों एक जैसी बातें नहीं है।
तुम्हें भ्रम है
मुझे भी भ्रम है
दोनों एक जैसी बातें नहीं है।
तुमने मुझे प्रेरणा दी
मैंने तुमसे प्रेरणा ली
दोनों एक जैसी बातें नहीं है।
००००
तिल भर जगह
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किसे बचा कर रखूं
क्या बचा कर रखूं
रखने को कोई कोना नहीं मेरा
यहां तिल भर जगह भी नहीं है मेरी
सब कुछ है तुम्हारा....
०००
02 जून, 2025
अनुसिरजण- च्यार पोलिश कवितावां
मूल कवि- काज़िमिएरज़ बुर्नात (पोलैंड)
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कवि परिचै - काज़िमिएरज़ बुर्नात रो जलम 1 जुलाई, 1943 डुनाजेक नदी रै कांठै बस्यै स्ज़ेपनोविस गांव मांय हुयो। व्रोकला यूनिवर्सिटी सूं आपरी भणाई हुई। पोलिश कवि, निबंधकार, अनुवादक, पत्रकार, आलोचक अर संस्कृतिकर्मी पेटै आप रो नांव जगत ओळखीजतो। आपरी 23 कविता-पोथ्यां नै 50 सूं बेसी दूजी पोथ्यां छप्योड़ी। रचनावां रो चेक, यूक्रेनी, बेलारूसी, रूसी, स्लोवेनियाई अर हंगेरियन समेत देस-विदेस री 44 भाषावां मांय अनुवाद हुयोड़ा। आप सौ नैड़ी पोथ्यां रो संपादन करियो नै इण सूं बेसी पोथ्यां री भूमिकावां लिखी। आप 370 सूं बेसी संकलनां अर मोनोग्राफ रै सहलेखक रूप ई रैया। केई साहित्यिक कार्यशालावां रा मार्गदर्शक अर पुरस्कारां रा निर्णायक ई रैया। राष्ट्रीय अर अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक जलसां रो आयोजन अर सहभागी रैवण री लिस्ट लांबी। पोलानिका-ज़ड्रोज में ‘पोएट्स विदाउट बॉर्डर्स’ नांव सूं अंतरराष्ट्रीय कविता महोत्सव रो आयोजन आप कारिया करै। यूक्रेन रा लेखक संघ सूं सांस्कृतिक आयोजना मांय लांठी भागीदारी। यूक्रेनी साहित्य रै प्रचार-प्रसार खातर सम्मानित हुयोड़ा। राज्य, मंत्रालय अर प्रादेशिक स्तर रा केई पुरस्कार मिल्योड़ा, जिण में ‘ग्लोरिया आर्टिस’ रो सिल्वर मेडल जैड़ो नामी तगमो ई भेळो। बरस 2019 रो जारोस्लाव पुरस्कार, बरस 2022 रो लोअर सिलेसियन पुरस्कार, बरस 2023 रो संस्कृति मंत्रालय रो पुरस्कार अर शब्दगुच्छ अंतरराष्ट्रीय कविता पुरस्कार (यूएस/ बांग्लादेश) सूं आदरीज्या थका। पोलानिका-ज़ड्रोज रा मानद नागरिक। बरसां ‘डायसोनांस’ साहित्य समूह रा उपाध्यक्ष, फेर अध्यक्ष ई रैया। ‘बेज़ कुर्तिनी’ पत्रिका रा आप प्रधान संपादक।
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1. अचरज
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आडो अजेस बाजै
अर अथाह पवित्रता बिच्चै
कल्पना रा बूंटा आगूंच पांगरै।
खिड़कियां री सेरियां मांय सूं सुर
बायरै मांय पांख्यां री फड़फड़ाहट,
बागां री राजकंवरियां घोळै रंगां मांय खिलै।
एक चावना उण रै कळजै रड़कै–
बिदाम री
पण रोसणी मांय सोवणी आंख्यां–
उण नै नींद मांय डूबण सूं बरजै।
जूण तो बस पाणी रै एक टोपै दांई,
कांठां डूबीजणो ताबै बारै-
तो सा इण रै सार नै समझो–
अर सागर पूग्या हो तो
आणंद लेवणो ई समझो।
०००
2. बा ओळूं महकै
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मा,
म्हनै चेतै है-
फसलां अर परसेवै री खुसबू
हंसिया सूं कटती
नाज री लहरां,
तूफान सूं ढळक्यां खेतां।
टूटोड़ी चाक्की रो हथ्थो,
भारी पाट भाठां रा,
गूगळी रोसणी बाती री,
आधी काची आधी पाकी
अंधारै मांय बणती रोटी।
थूं म्हारै अंतस थरप्यो
मैनत रो बीज,
जिको म्हरै साथै पांगरियो
जद-जद म्हैं भाळूं चाकी
सैंठा पगां बगतो रैवूं
थारै हाथां रो निवास
अबै उत्तो नीं लखावै
पण अजेस–
म्हारो संबल है थूं,
म्हारै अतंस
मा बसै है थूं।
०००
3. देवदूत
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रंग-रंगीलो घर रो बाग
दिन अबै जाग्यो है–
भवरां री गूंज सूं।
अर जीसा पैली सूं ही छगाई करै
टाबर पुळा बांधै
ललाट रै परसैवै नै
हथाळी सूं पूंछता
फेर थोड़ी बिसाई–
उभराणा पगां,
लीली घास माथै,
रूंखा री छियां हेठै।
आरती री घंट्यां बोल
बुलावै अरदास खातर
अर मा रोटी अरोगरण खातर
बाखळ ऊभी उडीकै
तप तप तावड़ै
एक मटमैली मिनकी
हुयगी राती,
उण रै नजीक एक पड़छियां
एक भोळै बाळ गोपाळ री
जिण रै मन-आंगणै
बाजै बाजा।
०००
4. सियाळै रै दिनां सूं पैली
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थकावट री होळै होळै होवै सरणाट,
फव्वारा रै लहरकां दांई साथै बगै
कैलेंडर होवतो जावै ओछो अर ओछो
पानी उमटीजै
अर फेर बरसां री धार मांय हालै–
जियां सूखो पानड़ो
तूटयां दरखत सूं
जड़ां रै नजीक री दरारां मांय
मढाई करियोड़ो जाळ मकड़ी रो–
साव पतळी डोर सूं
पण लिंडन री पांखड़ियां
अजेस ई उड़ै–
बायरै सूं ढळाण माथै
सायत अबार बगत कोनी
सियाळै रो
जिको चक्कू सो चमकै
सिंझ्या आं दिनां चमकै है।
०००
राजस्थानी अनुवाद- डॉ. नीरज दइया


